पाकिस्तान फिलहाल आर्थिक और राजनैतिक दोनों मोर्चों पर भारी उथल-पुथल झेल रहा है. पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को भ्रष्टाचार के आरोप में जेल होने के बाद शहबाज शरीफ पीएम बने, लेकिन उनका भी कार्यकाल ज्यादा नहीं चला. अब नेशनल असेंबली भंग करके चुनाव कराए जाएंगे. इस बीच अनवर-उल-हक काकर नए केयरटेकर पीएम बनाए गए हैं. समझिए, क्या है ये पद और कैसे काम करता है ।
इकनॉमिक तौर पर बुरी तरह पस्त पाकिस्तान में कुछ समय में चुनाव हो सकते हैं. इमरान खान को पद से हटाए जाने के बाद पीएम का पद खाली था और देश को चलाए रखने के लिए अस्थाई सरकार की जरूरत थी. ऐसे में अनवर उल हक कार्यवाहक पीएम बनाए गए. अब उनपर जिम्मा है कि वे ट्रांसपरेंट चुनाव कराएं. लेकिन सवाल ये है कि इस बीच अगर पाकिस्तान को कोई बड़ा फैसला लेने की जरूरत पड़ जाए तो क्या होगा. क्या कार्यवाहक पीएम के पास इतनी ताकत होती है कि वो अहम फैसले ले सके?
ये लोकतांत्रिक देशों का एक इंतजाम है, जो 3 स्थितियों में अपनाया जाता है
1. जब चुनी हुई सरकार किसी वजह से गिर जाए, तब केयरटेकर सरकार बनाई जाती है. असल में आनन-फानन तो चुनाव हो नहीं सकते. ये एक लंबी प्रोसेस है ताकि देश और पार्टियों को तैयारी का मौका मिले. इसी प्रोसेसिंग टाइम के दौरान एक अस्थाई सरकार बनाई जाती है, जो देश को चलाए रखे. इसमें जो पीएम होता है, उसे अंतरिम या कार्यवाहक या केयरटेकर प्रधानमंत्री कहते हैं।
2. दूसरी स्थिति वो है, जिसमें आम चुनाव के बाद तुरंत सरकार नहीं बनती, तब तक पुरानी सरकार ही केयरटेकर की तरह काम करती है. ये हालात तब आते हैं, जब किसी राजनैतिक पार्टी को क्लियर मेंडेट न मिला हो।
3. एक और स्थिति है, जिसमें इन्कंबेन्ट सरकार के खिलाफ संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाया जाए और वो पूरे वोट न जुटा पाए. तब भी सरकार गिर जाती है. यही डिजॉल्व हुई सरकार कुछ समय के लिए केयरटेकर रहती है।