न्यूज़- कोरियन एंटोनी

केदारनाथ मंदिर पर अभी भी मेरठ के चार युवक फंसे हैं। मंदिर स्थल पर लाइट न होने के कारण युवकों के मोबाइल भी डिस्चार्ज हो गए हैं। इस बीच खाने-पीने की भी दिक्कत चल रही है। बारिश के चलते रेस्क्यू ऑपरेशन रुक गया है।
जय देवी नगर निवासी जॉनी, तरुण, अंकित और अज्जू चारों दोस्त 29 जुलाई को घर से केदारनाथ दर्शन के लिए जाने की बात कह कर गए थे। चारों युवक कुशलता के साथ मंदिर पहुंच गए। इस बीच मंदिर के कपाट बंद होने के कारण वे लोग दर्शन नहीं कर पाए।
बुधवार रात राकेश के बेटे तरुण से फोन पर बात हुई थी। तब तक सब ठीक-ठाक था। तरुण ने पिता को बताया था कि वह गुरुवार को दर्शन करने के बाद लौटेंगे। सुबह टीवी पर बादल फटने खबर देखने के बाद उन्होंने फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया तो तरुण व अन्य के मोबाइल स्विच ऑफ थे।

जॉनी के बड़े भाई अश्वनी ने बताया कि मंदिर में लाइट नहीं है। खाने-पीने की भी दिक्कत है। भारी बारिश के चलते शुक्रवार को रेस्क्यू ऑपरेशन भी रुक गया। मंदिर में लगभग 5000 के आसपास लोग फंसे हुए हैं। फोन पर बातचीत के दौरान पुलिस ने भी आश्वस्त किया कि आज चारों युवकों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया जाएगा।

ब्रह्मपुरी के मोनू शर्मा और रिठानी के तनुज शर्मा भी केदारनाथ में फंसे हैं। उन्होंने परिजन को बताया कि अचानक से बादल फटने से सारे रास्ते बंद हो गए। रास्ता खुलने पर वह वापस घर के लिए रवाना होंगे। केदारनाथ से बाइक पर लौट रहे दिल्ली चुंगी निवासी मनोज शर्मा और उनकी पत्नी अदिति शर्मा तीनधारा में ऊपर से गिरे पत्थर से टकरा गए। जिससे उनकी बाइक गिर गई। अदिति सड़क पर और मनोज शर्मा खाई की ओर जा गिरे।
गढ़वाल मंडलायुक्त की ड्यूटी से लौट रहे बछेलीखाल चौकी के सिपाही राजेश और भूपेंद्र ने अपने वाहन में मौजूद रस्सी के सहारे खाई में उतर कर मनोज को बचाया। इसके अलावा माधवपुरम के अमित बंसल, पुनीत बंसल और मयंक बंसल केदारनाथ का दर्शन कर चढ़ाई से उतर रहे थे। बादल फटने के बाद से परिवार के लोगों की बेचैनी बढ़ गई। परिजन का कहना है कि मोबाइल स्विच ऑफ होने के कारण उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। स्थानीय पुलिस को इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।

केदारनाथ, बद्रीनाथ और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में 15 जुलाई से 15 अगस्त के बीच ट्रांसपोर्टर भी अपनी गाड़ियों को नहीं भेजते हैं। शारदा रोड जिंदल ट्रांसपोर्ट के संचालक विकास ने बताया कि बरसात के इस मौसम में पहाड़ी क्षेत्र में इस सीजन में लैंड स्लाइड का खतरा रहता है। ऐसे में शहर का कोई भी ट्रांसपोर्टर पहाड़ी क्षेत्र में बड़े वाहन नहीं भेजता है।