न्यूज़- कोरियन एंटोनी
हिमाचल में लोकसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के अलावा कोई भी तीसरा दल अपना दम नहीं दिखा पाया। हालांकि, हिमाचल विकास कांग्रेस (हिविकां) ने एक बार जरूर एक सीट जीती थी, लेकिन इसका कारण भी भाजपा के साथ गठबंधन रहा। बाकी दल सभी चुनावों में तीन फीसदी मत लेने की स्थिति में भी नहीं रहे। माकपा, बसपा, आप समेत कई पार्टियों ने प्रदेश में जड़ें जमाने के प्रयास किए, लेकिन पार्टियां खाता भी नहीं खोल सकीं। इस बार भी माकपा और आम आदमी पार्टी उम्मीदवार देने की तैयारी में है।
1980 से पहले भाजपा नहीं थी तो जनता पार्टी से जरूर सांसद बने। 1999 में हिमाचल विकास कांग्रेस यानी हिविकां ने भाजपा के सहयोग से शिमला में धनीराम शांडिल को उम्मीदवार बनाया था और वह जीत हासिल करने में कामयाब रहे। भाजपा और कांग्रेस से इतर किसी पार्टी से सांसद बनने वाले वह पहले नेता थे। 1980 के बाद से कांग्रेस और भाजपा में ही स्पर्धा लोकसभा चुनाव में जनता पार्टी से वर्ष 1977 में गंगा सिंह मंडी संसदीय क्षेत्र, बालक राम कश्यप शिमला, ठाकुर रणजीत सिंह हमीरपुर ससंदीय और कंवर दुर्गा चंद कांगड़ा संसदीय सीट से सांसद बने थे।
कांग्रेस तो शुरू से ही सक्रिय थी। 1980 में जनता पार्टी के बाद भाजपा अस्तित्व में आई तो तबसे से दोनों दलों में ही स्पर्धा है। हिमाचल प्रदेश में माकपा, आम आदमी पार्टी, बसपा, सपा, पीआरआईएसएम, आरडब्ल्यूएस, एसएचएस, एआईआईसीटी, दूरदर्शी पार्टी, जेपीएस, एलआरपी, आईएनसीओ, सोशलिस्ट पार्टी, केएमपीपी, एबीजेएस, लोजपा जैसे दल चुनाव में प्रत्याशी देते आए हैं, लेकिन उनके हाथ निराशा ही लगी।