न्यूज़- कोरियन एंटोनी
कार्यालय अधीक्षक और अन्यों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज हो गया है। चौ. ब्रह्मप्रकाश आयुर्वेद चरक संस्थान के डायरेक्टर-प्रिंसिपल ने शिकायत की है। एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों की भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं पाई गई हैं।
नजफगढ़ के खेड़ा डाबर स्थित चौ. ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेदिक चरक संस्थान (सीबीपीएसीएस) में कार्यालय अधीक्षक व अन्यों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोध शाखा ने धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है। आरोप है कि तत्कालीन कार्यालय अधीक्षक राजेश तंवर ने एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों की भर्ती में अनियमितताएं बरती।
भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के अलावा पीजी पाठ्यक्रमों के लिए फर्जी और जाली रिपोर्ट तैयार की गई। बाद में पाठ्यक्रमों के लिए की गई भर्ती प्रक्रिया की फाइलों को लिंक भी नहीं किया गया। मामला संज्ञान में आने के बाद इसकी पड़ताल की गई। कमेटी ने आरोपी सही पाने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) से मामले की शिकायत की। अब सीबीपीएसीएस के डायरेक्टर-प्रिंसिपल की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त और एसीबी प्रमुख मधुर वर्मा ने बताया कि 18 मार्च 2020 को सीबीपीएसीएस के डायरेक्टर-प्रिंसिपल प्रो. विदुला गुज्जरवर ने एक शिकायत दी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि कार्यालय अधीक्षक राजेश तंवर ने एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं बरती हैं। कार्यालय अधीक्षक ने न सिर्फ पीजी पाठ्यक्रमों के लिए फर्जी और जाली रिपोर्ट बनाई, बल्कि पीजी पाठ्यक्रमों के लिए भर्ती की फाइलों को लिंक भी नहीं किया।
मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि राजेश तंवर ने दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया। पूरी प्रक्रिया के दौरान जांच में कई विसंगतियां पाई गईं। अधीक्षक ने मानदंडों का पालन किए बिना सीबीपीएसीएस में अतिरिक्त रिक्तियां बनाई और एसोसिएट प्रोफेसर व असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए डॉ. आलोक कुमार अस्थाना और डॉ. मुकेश कुमार शर्मा को गलत तरीके से भर्ती करा दिया।
दोनों के पास इन पदों के लिए आवश्यक योग्यता नहीं थी। भर्ती प्रक्रिया की जांच समिति ने पहले उन्हें अयोग्य करार दिया था। इसके बाद राजेश तंवर के दखल के बाद दूसरी जांच समिति ने दोनों को पदों के लिए उपयुक्त करार देकर साक्षात्कार के लिए शॉर्टलिस्ट किया। इसके बाद दोनों का चयन कर उनको विभाग में तैनात कर दिया गया। गड़बड़ी की शिकायत मिलने के बाद जांच कमेटी ने राजेश तंवर व अन्यों को इस पूरे मामले में आरोपी पाया। इसके बाद एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की गई।