युवक ने कहा कि अफसोस है कि मुझे यह समझने में अपनी जीवन के 10 साल गंवाने पड़े की नशा मेरी जिंदगी बर्बाद कर रहा है। आज मैं अपनी दिनचर्या अच्छे तरीके से जी रहा हूं।
बचपन से देखता आया कि मेरे चाचा और अन्य रिश्तेदार सिगरेट और शराब का सेवन करते थे। फिर मैंने एक हिंदी फिल्म देखी। इसमें एक शराब पीने वाले किरदार को कितना रौबदार दिखाया है। मुझ पर इसका गहरा असर पड़ा। इसके बाद यार दोस्त ऐसे मिल गए जो कहते थे। आओ सिगरेट पीते हैं। एक सिगरेट से क्या होगा।
मैंने सोचा पिता जी भी तो पीते हैं, इससे थोड़ी कुछ होता है। वहां से मेरे जीवन में नशे का दलदल शुरू हुआ और मैं इसमें धंसता ही चला गया। अब जब बाहर निकला तो जीवन का अहम हिस्सा गंवा चुका है। नशे के कारण पत्नी से तलाक हो गया और अब माता-पिता का इकलौता सहारा हूं। ऊना शहर में रहने वाले एक एमटेक पास युवक का यह कहना है।
मैं सुबह और शाम नशे में रहने लगा। वहां से जब वापस भारत लौटा तो यहां दिन में नशा ढूंढना और करना आसान नहीं था, लेकिन नशे की लत ऐसी थी कि मैं घर आकर दिन में नशा करने लगा। नशे में रहने के कारण पत्नी से झगड़े होने लगे और अंततः तलाक हो गया। इसके बाद माता-पिता ने मेरा हाथ थामा और मेरी लत को छुड़वाने के लिए नशा छुड़ाओ केंद्र में संपर्क किया। वहां हमें बताया गया कि एक नशेड़ी और अच्छे जीवन में अंतर क्या है। पूरा दिन किस प्रकार की गतिविधियों में बिताना और नशे से कैसे बचकर रहना, यह हमें सिखाया गया।
करीब चार महीने लगे और नशे के बिना जीवन बेहतर लगने लगा। अफसोस है कि मुझे यह समझने में अपनी जीवन के 10 साल गंवाने पड़े की नशा मेरी जिंदगी बर्बाद कर रहा है। आज मैं ऊना अस्पताल में प्रतिदिन लगने वाले लंगर में सेवा करता हूं और अपनी दिनचर्या अच्छे तरीके से जी रहा हूं। मेरे माता-पिता भी मुझे देखकर खुश हैं। युवक ने कहा कि नशा किसी भी प्रकार का हो यह हमारा मानसिक स्वास्थ्य खराब करता है। हमारी युवा पीढ़ी को सबसे अधिक इससे बचाने की आवश्यकता है।
नशा मुक्त अभियान में हुआ शामिल
दवाई को बना लिया नशे का खुराक
स्कूल-कॉलेज नशा माफिया का टारगेट
बता दें कि वर्तमान में ऊना में जमीन स्तर पर नशे के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान छिड़ा है जो एक साल तक जारी रहेगा। इसकी निगरानी खुद उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री कर रहे हैं। इसमें शैक्षणिक संस्थानों में विभिन्न गतिविधियों से नशे के दुष्परिणाम जा रहे हैं। इसके साथ पुलिस प्रशासन ने भी नशा माफिया के खिलाफ कमर कस ली है। पुलिस अधीक्षक ऊना अर्जित सेन ठाकुर ने बताया कि जिले में इस साल पुलिस ने नशे के खिलाफ 134 मामले दर्ज किए।
ऊना में संभवतः देश का पहला ऐसा जिला है जहां नशे के खिलाफ अभियान इतने बड़े स्तर पर चला है। जमीनी स्तर पर उतरकर हर विभाग का अधिकारी युवाओं को नशे के खिलाफ जागरूक करने में जुटा है। यह समय की मांग है। अगर हम अभी से सतर्क नहीं हुए तो भविष्य की पीढ़ी को नशे से बचाना बेहद मुश्किल हो जाएगा। स्थानीय लोग भी इस अभियान में भागीदारी सुनिश्चित करें। – राघव शर्मा, उपायुक्त ऊना।