हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के कृष्णानगर में आपदी लापरवाही की देन है। वर्ष 2012 में इसमें भूगर्भीय रिपोर्ट में जता दिया गया था कि यह क्षेत्र ज्यादा बारिश के कारण धंस सकता है। उस दौरान निश्चित क्षेत्र में राजीव गांधी आवास योजना में कुछ आवास बनाए गए थे। इन मकानों के संबंध में राज्य सरकार के उद्योग विभाग के तहत आने वाले भू-विज्ञान प्रकोष्ठ के विशेषज्ञों से भूगर्भीय रिपोर्ट ली गई थी। उस रिपोर्ट में कहा गया था कि इस क्षेत्र में ज्यादातर भवन 20 से 35 डिग्री के स्लोप के बीच बनाए जा रहे थे।
इस रिपोर्ट में कहा गया था कि वहां पर मृदा की स्थिति इस तरह की थी कि ज्यादा बारिश की वजह से भूस्खलन की स्थिति हो सकती है। इसमें रिपोर्ट के बावजूद यहां पर राजीव गांधी आवास योजना में मकान बना लिए गए थे। सिलसिला यहीं नहीं रुका। यहां पर कच्चे भवनों को पक्का करने का मामला आगे बढ़ता रहा और इस बार की बारिश ने यहां पर तबाही का मंजर खड़ा कर दिया। इस तरह की रिपोर्ट शिमला के अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न भवनों के बारे में जारी की गई है। इन भूगर्भीय रिपोर्ट में सशस्त्र अनुमतियां दी गई हैं। वहीं, राज्य भू-विज्ञानी पुनीत गुलेरिया का कहना है कि समय-समय पर भूगर्भीय रिपोर्ट दी जाती है। शिमला के संबंध में भी अलग-अलग बूथ में अलग-अलग क्षेत्रों की रिपोर्ट बनी है।
कृष्णानगर में 13 दिन से पानी नहीं
वहीं, नागरिक सभा शिमला की वार्ड कमेटी ने सोमवार को पानी की समस्या को लेकर शिमला जल प्रबंध निगम लिमिटेड (एसजेपीएनएल) के महाप्रबंधक राजेश कश्यप को ज्ञापन सौंपा। शिमला नागरिक सभा के संयोजक संजय चौहान ने बताया कि कृष्णानगर में हुए भूस्खलन के कारण पानी के पाइप टूट गए हैं।
राजीव आवास योजना के तहत बने भवनों में 13 दिन से पानी की आपूर्ति नहीं हो रही। राजेश कश्यप ने आश्वासन दिया कि समस्या का समाधान जल्द किया जाएगा। इस मौके पर सह संयोजक अमित कुमार, सहसंयोजक विजेंद्र मेहरा, जगत राम विनोद, सलमा, फालमा चौहान, प्रीति, जसवंत और ज्योति मौजूद रही।